हे परवरदिगार
अश्कोंकी बारिशों में भीगतासा मैं चला पथरीली राहों में लडखडाता गीर पडा तू दिखादें नूर तेरा ढूंढता फिर मैं चला जल रहा हूँ मौला मेरे छोड़ देअब यह गिला धुंध-अंधेर हर ड़गर में तेरा कैसा यह सिला हे परवरदिगार, मेरा प्राणपखेरु उड़ चला डूब रही है आसूवन में तेरी बनाई हर सहर तेरी गालिब राहों पर अब टूट रहा है हर कहर मर रहे हैं ख्वाब सारे मर रही है हर महर झ...